|
रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट कम किया
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया भर में आई मंदी से निपटने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपने रेपो रेट में कमी की है ताकि बैंकों को कम ब्याज़ पर ऋण मुहैया
हो सके.
मंदी का भारतीय बाज़ारों पर भी असर हुआ है और अधिकतर बैंकों में नकदी का संकट आ गया है. रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट 100 अंक घटाकर 8 प्रतिशत कर दिया है. वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रेपो रेट कम किए जाने पर कहा कि इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा और विकास की दर स्थाई रखी जा सकेगी, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बनाया जा सकेगा. इसी के मद्देनज़र रिज़र्व बैंक ने विभिन्न उपाय किए है और इसी की शृंखला में सोमवार को रेपो रेट में कमी की गई है. बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वैश्विक वित्तीय स्थिति अस्थिर है और इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है जिसके करण क्रेडिट बाज़ार दबाव में है. इससे पहले रिज़र्व बैंक ने कैश रिज़र्व रेसियो के रेट में भी कमी की थी. ये वो पैसा होता है जो बैंकों को रिज़र्व बैंक में रखना होता है. सोमवार को बैंक ने रेपो रेट में जो कमी की है उससे मंहगाई में कमी हो सकती है. |
इससे जुड़ी ख़बरें
ब्याज दरों में मामूली वृद्धि25 अक्तूबर, 2005 | कारोबार
भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो दर बढ़ाई24 जनवरी, 2006 | कारोबार
'भारतीय अर्थव्यवस्था पश्चिम से अलग'22 जनवरी, 2008 | कारोबार
रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति का इंतज़ार28 अप्रैल, 2008 | कारोबार
महँगाई सात साल के रिकॉर्ड स्तर पर13 जून, 2008 | कारोबार
महँगाई पर क़ाबू पाने की कोशिश24 जून, 2008 | कारोबार
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||