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शुक्रवार, 16 फ़रवरी, 2007 को 02:44 GMT तक के समाचार
 
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एस्सार का हिस्सेदारी छोड़ने से इनकार
 
मोबाइल
रूईया का कहना है कि वो दूरसंचार कारोबार से नहीं हटेंगे
मोबाइल कंपनी हचिसन-एस्सार पर वोडाफ़ोन का नियंत्रण होने के बावजूद एस्सार ने साफ किया है कि वह कंपनी में अपनी 33 फ़ीसदी हिस्सेदारी नहीं छोड़ेगा.

ग़ौरतलब है कि ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी वोडाफ़ोन ने भारत की चौथी सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी हचिसन-एस्सार में हच की 67 फ़ीसदी हिस्सेदारी को 11 अरब 10 करोड़ डॉलर में खरीद लिया है.

इसके बाद वोडाफ़ोन की ओर से इस तरह के संकेत मिल रहे थे कि वो कंपनी पर पूरा नियंत्रण कर सकती है.

लेकिन वोडाफ़ोन के सीईओ अरूण सरीन के साथ मुलाक़ात के बाद एस्सार समूह के उपाध्यक्ष रवि रूईया ने कहा कि वो अपनी हिस्सेदारी नहीं छोड़ेंगे.

 हमारा रूख साफ है कि हम दूरसंचार कारोबार में लंबी रेस के घोड़े हैं और हमारा इस कंपनी या कारोबार को छोड़ने का कोई इरादा नहीं है
 
रवि रूईया

उन्होंने कहा, "हमारा रूख साफ है कि हम दूरसंचार कारोबार में लंबी रेस के घोड़े हैं और हमारा इस कंपनी या कारोबार को छोड़ने का कोई इरादा नहीं है."

एस्सार का कहना है कि वोडाफ़ोन ने नए सिरे से कारोबार को आगे बढ़ाने में साझीदार बनने की पेशकश की है.

इस पर रूईया का कहना था, "हम भविष्य के बारे में सही समय पर कोई फ़ैसला करेंगे जो एस्सार समूह के हित में होगा."

सरीन की सफाई

उधर सरीन ने भी कहा कि वो रूईया के साथ मिल कर भारत में कारोबार करने के लिए तैयार हैं.

उन्होंने कहा, "हम बेहतरीन साझीदारी की उम्मीद कर रहे हैं. हम रूईया परिवार को बहुत सम्मान देते हैं."

वोडाफ़ोन ने एस्सार की हिस्सेदारी भी हच से हुए सौदे की क़ीमत पर खरीदने की बात कही थी.

लेकिन एस्सार के कंपनी से हटने के बावजूद नई समस्या खड़ी हो जाती क्योंकि भारत में किसी दूरसंचार कंपनी में विदेशी हिस्सेदारी की अधिकतम सीमा 74 प्रतिशत ही है.

 
 
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