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आर्थिक आशावाद बढ़ रहा है:चिदंबरम
 
पी चिदंबरम
चिदंबरम को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया
भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि देश में आर्थिक विकास में तेज़ी आ रही है और आर्थिक वातावरण में आशावाद बढ़ रहा है.

पी चिदंबरम को दुनिया के साथ विकसित देशों के संगठन जी-7 के लंदन में हो रहे सम्मेलन से एक दिन पहले नेताओं को संबोधित करने का मौक़ा मिला.

पी चिदंबरम ने कहा, "भारत की आर्थिक सफलता को आँकने के लिए जिन चार तत्वों की ज़रूरत की जा सकती है वे हैं - लोकतंत्र, वैश्वीकरण, बेहतर बुनियादी ढाँचा और एक ठोस वित्तीय क्षेत्र. ये चार तत्व पिछले 15 वर्षों में तेज़ी से एकजुट होकर आगे बढ़े हैं जिनसे सकल घरेलू उत्पाद 3.5 प्रतिशत से बढ़कर 6.3 प्रतिशत तक पहुँच या है."

भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम को जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिन की इस बैठक के मौक़े पर विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है. भारत के अलावा चीन, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका वित्त मंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया है.

ब्रिटेन के वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि ये ऐसे महत्वपूर्ण देश हैं जिन्हें उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाला देश माना जा रहा है.

वित्त मंत्री ने कहा कि इस प्रगति और सफलता के पीछे जो चीज़ नज़र आनी चाहिए वो है बुद्दिमत्ततापूर्ण सोच और कठिन परिश्रम लेकिन अभी हमें लंबा रास्ता तय करना है."

हमारा लक्ष्य...
 भारत देश आज महत्वकांक्षी व्यक्तियों और उद्योग समूहों से भरा हुआ है जिससे हमें ऐसी नीतियाँ बनाने की ताक़त मिली है जिनसे आर्थिक विकास की प्रक्रिया और आगे बढ़ेगी. देश के वित्त मंत्रालय में हमारा यही मुख्य लक्ष्य है.
 
पी चिदंबरम

"मेरे विचार में 1985 से 1995 और फिर 2005 तक के दौर में जो दिलचस्प चीज़ें नज़र आती हैं वो हैं आत्मविश्वास और आशावाद. उससे पहले भारत और भारतीय व्यावसायी चिंतित थे और कुछ निराशावादी भी."

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरपूर और आशावादी है जो ऊर्जा से भरपूर है और नए-नए प्रयोगों की ऐसी भावना नज़र आ रही है जैसी पहले कभी नहीं देखी गई.

"भारत देश आज महत्वकांक्षी व्यक्तियों और उद्योग समूहों से भरा हुआ है जिससे हमें ऐसी नीतियाँ बनाने की ताक़त मिली है जिनसे आर्थिक विकास की प्रक्रिया और आगे बढ़ेगी. देश के वित्त मंत्रालय में हमारा यही मुख्य लक्ष्य है."

जी-7 देशों के संगठन में अमरीका, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, इटली, फ्रांस और कनाडा हैं. दुनिया की कुल आबादी का 14 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं सात देशों में रहता है लेकिन दुनिया की कुल संपदा का दो तिहाई हिस्सा इन्हीं सात देशों के पास है.

 
 
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