पश्चिम बंगाल: एसआईआर विरोधी प्रदर्शनों को लेकर बढ़े तनाव में न्यायिक अधिकारियों का घेराव, 'मुख्य अभियुक्त' गिरफ़्तार

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, पश्चिम बंगाल के मालदा में हुई घटना की जाँच एनआईए को दे दी गई है
    • Author, मयूरी सोम
    • पदनाम, बीबीसी बांग्ला रिपोर्टर, कोलकाता
  • पढ़ने का समय: 10 मिनट

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

राज्य के मालदा ज़िले में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के आरोप में पश्चिम बंगाल पुलिस ने क़रीब 35 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

इस बीच शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, इस घटना की जाँच के लिए नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की एक टीम पश्चिम बंगाल पहुँची.

वहीं पश्चिम बंगाल की क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) ने शुक्रवार को मालदा में हुई हिंसा को कथित तौर पर 'भड़काने वाले मुख्य अभियुक्त' मोफ़क्करुल इस्लाम को गिरफ़्तार कर लिया है.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

माफ़ी चाहते हैं, हम इस स्टोरी का कुछ हिस्सा लाइटवेट मोबाइल पेज पर नहीं दिखा सकते.

तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस्लाम साल 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के उम्मीदवार थे.

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर साल 2021 के चुनावों में राज्य की इताहार विधानसभा सीट से एआईएमआईएम के उम्मीदवार के तौर पर मोफ़क्करुल इस्लाम का नाम दर्ज है. हालाँकि बीबीसी इसकी पुष्टि नहीं कर पाया है कि दोनों एक ही शख़्स हैं.

मालदा में क्या हुआ

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, मालदा में लोगों को कथित तौर पर लोगों को भड़काने वाले मुख्य अभियुक्त को गरिफ़्तार कर लिया गया है (तस्वीर में बीच में)

एसआईआर के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से अब तक 63 लाख से ज़्यादा वोटरों के नाम हटाए जा चुके हैं. क़रीब 49 लाख 'विचाराधीन' मतदाताओं के मामलों के निपटारे के साथ ही हटाए गए वोटरों में लाखों नए नाम और जुड़ सकते हैं.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को, पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले भर में एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए थे.

वोटर लिस्ट से अपना नाम हटाए जाने पर गुस्सा और निराशा व्यक्त करते हुए प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने मतदाता के रूप में अपनी पहचान साबित करने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ जमा किए थे.

उन्होंने इन नामों को हटाए जाने को अन्यायपूर्ण बताया.

प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग 12 को भी काफ़ी लंबे समय तक रोके रखा. ख़बरों के अनुसार, इस दौरान सड़क पर टायर भी जलाए गए.

आंदोलन के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर मालदा के कालियाचक स्थित एक 'ब्लॉक विकास कार्यालय' को घेर लिया, जहाँ सात न्यायिक अधिकारी एसआईआर से संबंधित मामलों का निपटारा कर रहे थे.

इन अधिकारियों में तीन महिलाएँ भी शामिल थीं. कथित तौर पर वे कई घंटों तक कार्यालय के भीतर ही फँसे रहे, जब तक कि राज्य पुलिस के अधिकारियों ने आधी रात के आसपास उन्हें सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया.

जब उन्हें सुरक्षित जगह पर ले जाया जा रहा था, तो प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया और उन पर बांस की डंडों और ईंटों से हमला किया.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट ने मालदा की घटना पर सख़्त टिप्पणी की (फ़ाइल फ़ोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल को भारत के चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह इस घटना की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, जैसे सीबीआई या एनआईए को सौंप दे.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि "उन सभी जगहों पर पर्याप्त केंद्रीय बल तैनात किए जाएं, जहां एसआईआर की प्रक्रिया के तहत आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया है."

बेंच ने आगे कहा कि घटना के दौरान न्यायिक अधिकारियों को खाना और पानी उपलब्ध नहीं था.

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत इस बेंच की अध्यक्षता कर रहे थे. उन्होंने कहा कि "न तो ज़िला मजिस्ट्रेट और न ही पुलिस अधीक्षक, बीडीओ कार्यालय पहुंचे, जहां अधिकारियों को घेरा गया था."

कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि रात 8:30 बजे तक राज्य प्रशासन की ओर से "साफ़ तौर पर सुस्ती" दिखाई दी.

कोर्ट में मौजूद रिकॉर्ड के मुताबिक़ "..राज्य के मुख्य सचिव से संपर्क नहीं हो सका, क्योंकि उन्होंने वाट्सऐप सुविधा वाला कोई मोबाइल नंबर साझा नहीं किया था, जिसकी वजह से उन्हें कोई मैसेज नहीं भेजा जा सका."

बाद में गुरुवार, 2 अप्रैल को, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, चुनाव आयोग ने एनआईए को मालदा घटना की जांच करने का निर्देश दिया. शीर्ष अदालत के आदेशों के अनुसार, एनआईए की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अदालत में जमा की जानी है.

पश्चिम बंगाल पुलिस ने अब तक क्या कहा है?

पश्चिम बंगाल पुलिस के एक उच्च-पदस्थ सूत्र ने बीबीसी को बताया कि मुख्य मुख्य अभियुक्त मोफ़क्करुल इस्लाम शुक्रवार सुबह सिलीगुड़ी के बागडोगरा हवाई अड्डे के रास्ते भागने की कोशिश कर रहा था.

इस सूत्र ने आगे बताया कि इस्लाम के पास से बरामद दस्तावेजों के अनुसार, वह एक वकील हैं.

इस्लाम के सहयोगी, अकरमुल बागानी को भी सिलीगुड़ी में गिरफ़्तार कर लिया गया है.

सूत्र ने आगे कहा, "इस्लाम का नाम एफ़आईआर में घटना के लिए 'मुख्य उकसाने वाले' के रूप में दर्ज था. सिलीगुड़ी पुलिस और सीआईडी ने मिलकर इस्लाम को गिरफ़्तार. अब उनसे आगे की पूछताछ की जाएगी."

नॉर्थ बंगाल के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) के. जयरमन ने शुक्रवार, 3 अप्रैल, 2026 को बताया कि अब तक इस घटना के संबंध में 19 मामले दर्ज किए गए हैं और अब तक 35 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

एडीजी ने कहा, "एनआईए को जांच का जिम्मा सौंपा गया है. वे आते हैं तो इस मामले की जांच अपने हाथ में ले लेंगे."

एसआईआर को लेकर इतना विवाद क्यों है?

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, कई राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए गए (सांकेतिक तस्वीर)

पिछले साल पश्चिम बंगाल समेत भारत के कुल 12 राज्यों में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) शुरू किया गया था. इस प्रक्रिया के ज़रिए 7.6 करोड़ मतदाताओं की पात्रता की जाँच की गई.

एसआईआर के पहले चरण में मतदाताओं या उनके माता-पिता के नामों को साल 2002 की वोटर लिस्ट से मिलाने का काम किया गया. चुनाव आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में पिछली बार साल 2002 में एसआईआर किया गया था.

28 फरवरी को जारी की गई राज्य की अंतिम वोटर लिस्ट में 6.44 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल थे. इस प्रक्रिया के तहत क़रीब 63 लाख 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट' मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए.

वहीं क़रीब 60 लाख मतदाताओं की स्थिति 'जाँच के अधीन' बनी रही.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद क़रीब 700 न्यायिक अधिकारियों को 'जाँच के अधीन' मौजूद वोटरों के रिकॉर्ड की जाँच करने और उनकी मतदान पात्रता तय करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई.

अब तक 49 लाख से ज़्यादा 'जाँच के अधीन' रखे गए मामलों का निपटारा किया जा चुका है, लेकिन इस प्रक्रिया में हटाए गए मतदाताओं की सही संख्या अभी भी पता नहीं है.

कोलकाता स्थित थिंकटैंक 'सबर इंस्टीट्यूट' के एक विश्लेषण के अनुसार, पहले और दूसरे चरण में न्यायिक अधिकारियों ने जिन वोटरों को वोटर लिस्ट से हटाया है उनमें सबसे ज़्यादा प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं का है.

चुनाव आयोग के आँकड़े और सबर इंस्टीट्यूट का विश्लेषण यह भी बताते हैं कि मालदा के सुजापुर विधानसभा क्षेत्र में केवल 0.58 प्रतिशत मतदाता ही 'अनमैप्ड' (यानी 2002 की लिस्ट से लिंक नहीं) पाए गए.

लेकिन सबर इंस्टीट्यूट के अनुसार, इसकी तुलना में इस विधानसभा क्षेत्र में 'जाँच के अधीन' रखे गए मतदाताओं का प्रतिशत 52.49 था.

मालदा के मोथाबाड़ी और सुजापुर विधानसभा क्षेत्रों में, 28 फरवरी तक दो लाख से ज़्यादा मतदाताओं के नाम 'जाँच के अधीन' लिस्ट में डाल दिए गए थे.

बुधवार को दोनों विधानसभा क्षेत्रों के निवासियों ने वोटर लिस्ट से अपने नाम हटाए जाने के विरोध में ज़ोरदार प्रदर्शन किया.

सबार इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता साबिर अहमद ने बीबीसी बांग्ला को बताया, "हमने डेटा का विश्लेषण किया और पाया कि 'जाँच के अधीन' रखे गए मामलों के निपटारे के तहत नाम हटाने के मामले राज्य की मुस्लिम आबादी का अनुपात सबसे ज़्यादा है. यह ख़ासकर मालदा और मुर्शिदाबाद में है."

"संयोग से इन ज़िलों में ऐसे मतदाताओं का प्रतिशत भी काफ़ी ज़्यादा था, जो ख़ुद को या अपने परिवार को साल 2002 की मतदाता सूची से सफलतापूर्वक जोड़ पाए थे."

उन्होंने आगे कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया के कारण राज्य के मतदाताओं में बेबसी की भावना पैदा हुई है.

उन्होंने कहा, "मैं हिंसा का समर्थन नहीं करता, लेकिन मालदा की घटना मतदाताओं के तौर पर अपने अधिकारों को लेकर लोगों की चिंताओं का ही एक रूप है."

मुख्यमंत्री क्या कह रही हैं?

मालदा में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े हालिया घटनाओं ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है.

पिछले कुछ हफ़्तों में, भारत के चुनाव आयोग ने राज्य के पुलिस प्रशासन और नौकरशाही में बड़े फेरबदल के आदेश दिए हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन बदलावों पर बार-बार अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी.

हालाँकि, नए नियुक्त प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को तब आलोचना का सामना करना पड़ा, जब सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि "अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है."

शुक्रवार को उत्तर दिनाजपुर के हरिरामपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, "क्या आप जानते हैं कि मालदा के मोथाबाड़ी में हुई घटना के दोषी को रंगे हाथों किसने पकड़ा? यह हमारी सीआईडी थी. एनआईए के पहुँचने से पहले ही उन्होंने मुख्य अभियुक्त को गिरफ़्तार कर लिया था."

उन्होंने आगे बीजेपी, कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ़) जैसी विपक्षी पार्टियों पर इस घटना को भड़काने का आरोप लगाया.

एक दिन पहले, उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य में 'राष्ट्रपति शासन लगाने की एक साज़िश' चल रही है, और कहा था कि राज्य की क़ानून-व्यवस्था की स्थिति को और बिगाड़ने के लिए एक साज़िश रची जा रही है.

मुख्यमंत्री ने आम लोगों से आग्रह किया कि वे "किसी भी उकसावे में न आएँ, किसी मुसीबत में न पड़ें, और न्यायिक अधिकारियों को हाथ न लगाएं."

विपक्षी दलों का आरोप

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार ने मुख्य अभियुक्त और टीएमसी के बीच क़रीबी का आरोप लगाया

केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता सुकांत मजूमदार ने मुख्य अभियुक्त और तृणमूल कांग्रेस के बीच कथित संबंधों की ओर इशारा किया.

उन्होंने कहा, "(गिरफ़्तार मुख्य अभियुक्त) मोफ़क्करुल इताहार का रहने वाला है. इताहार उस तृणमूल कांग्रेस विधायक का गृह नगर है, जो उनकी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष भी हैं. इसलिए, यह पता लगाने के लिए गहन जांच की ज़रूरत है कि मोफ़क्करुल वास्तव में किसके लिए काम कर रहा था."

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि घटना के लिए उकसाने वाले मुख्य शख़्स ने बुधवार को एक कार के बोनट पर खड़े होकर भाषण दिया.

मजूमदार ने आरोप लगाया, "उसने भीड़ को इन न्यायिक मजिस्ट्रेट्स को रोकने के लिए उकसाया."

इस बीच मालदा की घटना पर टिप्पणी करते हुए सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने बीजेपी और तृणमूल पर पश्चिम बंगाल की राजनीति में विभाजन के एक हथियार के रूप में एसआईआर का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.

उन्होंने आरोप लगाया, "लोगों को रातों-रात बेघर करने की साजिश रची जा रही है. इस साजिश को रचने वालों के ख़िलाफ़ और जो लोग चुनाव परिणामों को अपने पक्ष में करने के लिए मतदाता सूचियों में हेरफेर करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ जनता का गुस्सा बढ़ रहा है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.स