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भारत और मलेशिया के नज़दीक आने का पाकिस्तान पर क्या असर होगा?
- Author, सैय्यद मौज़िज़ इमाम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7-8 फरवरी को मलेशिया की यात्रा पर थे. इस साल प्रधानमंत्री की यह पहली विदेश यात्रा थी. प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट पर रिसीव करने के लिए मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम खुद पहुंचे थे.
यह दौरा इसलिए अहम हो जाता है. क्योंकि पिछले साल अक्तूबर 2025 में क्वालालमपुर में हुए आसियान शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिस्सा नहीं लिया था क्योंकि पहलगाम हमले के बाद 2025 में दोनों देशों के बीच रिश्तों में गर्माहट कम हो गई थी.
हालांकि मलेशिया ने पहलगाम हमले की निंदा की थी. लेकिन मलेशिया के प्रधानमंत्री ने भारत पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत में मध्यस्थता करने की पेशकश की थी. इस वजह से भारत नाराज़ था.
भारत और मलेशिया के बीच प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान तकरीबन 11 समझौते और एमओयू हुए हैं. दोनों देशों के संयुक्त बयान में सीमा पार से आतंकवाद का ज़िक्र होना भारत के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद कहा, "दोनों देशों ने साफ़ किया है कि आतंकवाद पर कोई दोहरी नीति नहीं रहेगी न ही आतंकवाद से कोई समझौता होगा."
मलेशिया दौरा
मलेशिया और भारत के बीच 1957 से राजनयिक संबंध और आपसी साझेदारी है. इस साझेदारी को अगस्त 2024 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी (सीएसपी) का दर्जा दिया गया था.
प्रधानमंत्री के इस दौरे में दोनों पक्षों ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में संबंध मज़बूत करने पर ज़ोर दिया और सार्वजनिक रूप से विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा न करने का ध्यान रखा है.
खासकर ज़ाकिर नाइक के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर संयुक्त बयान में कुछ नहीं कहा गया है.
भारत और मलेशिया ने आतंकवाद विरोधी सहयोग, ख़ुफ़िया जानकारी साझा करने और संयुक्त राष्ट्र तथा वित्तीय कार्रवाई बल में इस मुद्दे पर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा की है.
भारत और मलेशिया के बीच संबंधों पर पूर्व राजनायिक अशोक सज्जनहार ने कहा, "जब से मलेशिया में अनवर इब्राहिम आए हैं, वह भारत से मित्रता बढ़ाने में लगे हैं. इसका कारण भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था है."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल के अंतराल के बाद मलेशिया की यात्रा कर रहे थे. इससे पहले वह दो बार मलेशिया जा चुके थे.
सज्जनहार कहते हैं, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद 'लुक ईस्ट' प़ॉलिसी लॉन्च की थी. इसका फायदा मिल रहा है."
भारत-मलेशिया के संयुक्त बयान में कहा गया, "भारत और मलेशिया आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं, जिसमें 'सीमा पार आतंकवाद' भी शामिल है."
इससे पहले मलेशिया और भारत के बीच 2015, 2017 और 2024 में आतंकवाद पर संयुक्त बयान आया था.
सज्जनहार कहते हैं, "इससे पहले तीन बार आतंकवाद पर तो बयान आया था. लेकिन पहली बार सीमा पार से आतंकवाद का ज़िक्र हुआ है जो भारत की कामयाबी है. क्योंकि भारत में पाकिस्तान से आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाता है. इसलिए यह संयुक्त बयान पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बन सकता है."
"इस वक्तव्य से दोनों देशों के बीच संबंधो में विश्वास पैदा होगा, खासकर महाथिर मोहम्मद के समय हुई तल्खी में सुधार होगा."
उन्होंने कहा, "इससे पहले महातिर मोहम्मद के समय भारत के रिश्ते ठीक नहीं थे. खासकर जब से महातिर ने कश्मीर का मसला संयुक्त राष्ट्र में उठा दिया था."
मलेशिया और भारत आसियान समूह का हिस्सा हैं. जानकारों के मुताबिक आसियान फ़ोरम में भारत की बढ़ती दिलचस्पी पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बन सकती है.
विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव ने कहा, "जिस तरह भारत आसियान के फ़ोरम में आतंकवाद का एजेंडा लेकर आ रहा है, उससे पाकिस्तान का चिंतित होना लाज़िमी है क्योंकि दोनों देश मलेशिया और भारत आतंकवाद पर आसियान की सब कमेटी के को-चेयर 2027 तक हैं."
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के लिए यह धक्का है कि सीमा पार आतंकवाद का ज़िक्र संयुक्त बयान में आया है. इससे पाकिस्तान की तरफ से चल रही गतिविधि को आसियान और अन्य फ़ोरम में लाना आसान रहेगा."
पाकिस्तान मलेशिया संबंध
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-मलेशिया के बीच के संबंध का असर पाकिस्तान पर भी पड़ सकता है.
दरअसल पीएम मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हुई, जब पाकिस्तान के नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ़ भी मलेशिया के दौरे पर थे.
उन्होंने रॉयल मलेशिया के नेवी के चीफ़ ज़ुलहेल्मी बिन इथनियान से मुलाकात की है.
पाकिस्तान अखबार डॉन के मुताबिक, "इस दौरान क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, संयुक्त अभ्यास, सूचना साझा करने और समुद्री डकैती व आतंकवाद जैसे ख़तरों से निपटने पर चर्चा हुई. हालांकि आधिकारिक बयानों में पेशेवर नौसैनिक संबंधों को मज़बूत करने और आपसी लाभ के लिए समुद्री सहयोग के विस्तार पर ज़ोर दिया गया है."
ऐतिहासिक रूप से, मलेशिया और पाकिस्तान के बीच 1957 से करीबी कूटनीतिक और रक्षा संबंध रहे हैं.
मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए भारत की कार्रवाइयों की आलोचना की थी और विवादों के समाधान के लिए पाकिस्तान के साथ सहयोग का सुझाव दिया था.
द हिंदू के मुताबिक दिसंबर 2021 में महाथिर मोह्म्मद ने संयुक्त राष्ट्र में कहा था, "भारत ने कश्मीर पर कब्ज़ा कर रखा है."
मलेशिया ने क्वालालाम्पुर समिट 2019 के साइडलाइन में भारत के नागरिकता कानून पर सवाल उठाया था. मलेशिया ने सवाल खड़े किए थे कि इससे मुस्लिम समुदायों के साथ संभावित भेदभाव हो सकता है.
जिसके बाद भारत ने मलेशिया के राजदूत को बुलाकर नाराज़गी ज़ाहिर की थी.
हालांकि पूर्व राजनायिक अशोक सज्जनहार का मानना है, "पिछली बातों से आगे निकलकर अब मलेशिया भारत की तरफ़ देख रहा है. इसकी एक वजह चीन और अमेरिका के बीच बढ़ रही तनातनी भी है. "
हालांकि उन्होंने कहा, "मलेशिया और पाकिस्तान के संबंधों पर ज्यादा असर नहीं होगा."
वह कहते हैं कि मलेशिया और पाकिस्तान का रिश्ता पुराना तो है लेकिन नए समीकरण में भारत के साथ मलेशिया अपने संबंध मज़बूत करना चाहता है.
विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव ने कहा, "पाकिस्तान इसके बाद कश्मीर मसले को लेकर मलेशिया को साथ लाने का प्रयास करेगा, हालांकि इसमें बहुत कामयाबी मिलने की संभावना कम है.'
सचदेव के मुताबिक़, "पाकिस्तान और मलेशिया के संबंधों पर फर्क तो नहीं पड़ेगा, लेकिन चिंता ज़रूर बढ़ेगी, इसका असर क्या होगा अभी कहना मुश्किल है."
भारत और मलेशिया के बीच रक्षा और आतंकवाद के मसले पर बातचीत तो हुई लेकिन व्यापार और उत्पादन संबंधी क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई है. इसमें अहम कड़ी है सेमीकंडक्टर.
सेमी कंडक्टर के क्षेत्र में सहयोग
सेमीकंडक्टर निर्यात के मामले में मलेशिया विश्व में छठे नंबर पर है.
डीडी न्यूज़ के मुताबिक, "प्रधानमंत्री इब्राहिम ने भारत के साथ व्यापार सहयोग बढ़ाने की आशा व्यक्त की और कहा कि यह 8.59 बिलियन डॉलर से आगे बढ़ सकता है. उन्होंने स्थानीय मुद्राओं भारतीय रुपये और मलेशियाई रिंगित के इस्तेमाल को 'अद्भुत उपलब्धि' बताया."
भारत मलेशिया से पॉम आयल और इलेक्ट्रानिक्स उत्पाद आयात करता है. वही एल्यूमिनियम और पेट्रोलियम उत्पाद को निर्यात करता है.
मलेशिया के प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने 11 द्विपक्षीय समझौते किए गए हैं, जिनमें कई एमओयू भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इसमें सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है.
मलेशिया और भारत के बीच सेमीकंडक्टर को लेकर समझौता किया है. इसमें तकनीकी सहयोग शामिल है.
संयुक्त वक्तव्य में कहा गया , "सेमीकंडक्टर उद्योग के रणनीतिक महत्व को स्वीकार किया गया और इस क्षेत्र में द्विपक्षीय तालमेल को मजबूत करने के पारस्परिक लाभ का उल्लेख किया."
अशोक सज्जनहार ने कहा, "सेमीकंडक्टर के उत्पादन के क्षेत्र में भारत ने क़दम रखा है. लेकिन मलेशिया का इसके उत्पादन में विश्व में छठवां स्थान है. इस समझौते से भारत को लाभ होगा."
भारत इस साल के अंत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेगा. संयुक्त बयान में, भारत ने केवल मलेशिया की सदस्य बनने की आकांक्षाओं का 'उल्लेख' किया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.