अमेरिका को जंग और सीज़फ़ायर में से एक को चुनना होगा- ईरान के मंत्री ने बीबीसी से कहा

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इमेज कैप्शन, ईरान के उप विदेश मंत्री सईद ख़ातिबज़ादेह (फ़ाइल फ़ोटो)
    • Author, टिनशुई युंग
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

ईरान के एक मंत्री ने बीबीसी को बताया कि बुधवार को लेबनान में इसराइली हमले अमेरिका और ईरान के बीच सीज़फायर समझौते का 'गंभीर उल्लंघन' थे.

ईरान के उप विदेश मंत्री सईद ख़ातिबज़ादेह ने कहा कि मंगलवार को तय हुए दो हफ़्ते के समझौते के दायरे में लेबनान भी था. हालांकि अमेरिका और इसराइल ऐसा मानने से इंकार कर रहे हैं.

ख़ातिबज़ादेह ने कहा कि अमेरिका को 'जंग और सीज़फ़ायर के बीच चुनाव करना होगा.'

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि बुधवार को हवाई हमलों में कम से कम 203 लोग मारे गए. इसराइल ने दावा किया है कि उसने हिज़्बुल्लाह के कमांड सेंटर और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.

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जब ईरानी उप विदेश मंत्री से पूछा गया कि क्या तेहरान भी हिज़्बुल्लाह से इसराइल की ओर रॉकेट दागना बंद करने को कहेगा, तो ख़ातिबज़ादेह ने दावा किया कि ईरान समर्थित इस समूह ने सीज़फ़ायर का 'पालन' किया था.

गुरुवार को हिज़्बुल्लाह ने कहा कि उसने 'सीज़फ़ायर के उल्लंघन के जवाब में रात में इसराइल की ओर मिसाइलें दागीं.'

हिज़्बुल्लाह ने यह भी धमकी दी कि जब तक लेबनान के ख़िलाफ़ 'इसराइली-अमेरिकी आक्रामकता' ख़त्म नहीं होती, वह अपने हमले जारी रखेगा.

हिज़्बुल्लाह ने सीज़फ़ायर का पालन किया?

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इमेज कैप्शन, स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को लेबनान पर इसराइली हमले में कम से कम 200 लोग मारे गए

बीबीसी रेडियो 4 के 'टुडे कार्यक्रम' से बात करते हुए, ख़ातिबज़ादेह ने कहा कि तेहरान ने बुधवार देर रात व्हाइट हाउस को 'बिलकुल साफ़' संदेश भेजा, जिसका सार यह था कि 'आप एक ही समय में दोनों चीज़ें नहीं कर सकते.'

"आपने सीज़फ़ायर के लिए कहा, सारे नियम और शर्तें मानीं. लेबनान समेत उन सभी इलाक़ों में इसके लागू होने की बात मानी और फिर आपके सहयोगी ने लेबनान में जनसंहार शुरू कर किया."

जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब है कि ईरान भी हिज़्बुल्लाह से इसराइल पर हमला रोकने को कहेगा, तो ख़ातिबज़ादेह ने जवाब दिया कि हिज़्बुल्लाह एक 'लेबनानी आज़ादी आंदोलन' है, जिसके बारे में वो ये 'कहने से हिचकते नहीं' कि उसे 'ईरान का समर्थन' हासिल है.

उन्होंने कहा कि जो समझौता हुआ, "जिसे ट्रंप ने एक व्यावहारिक फ़्रेमवर्क कहा था", उसके अनुसार ईरान, वॉशिंगटन और उनके सहयोगियों को सीज़फ़ायर का पालन करना था.

उन्होंने दावा किया कि हिज़्बुल्लाह ने 'काफ़ी हद तक इसका पालन किया था.'

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उप विदेश मंत्री से तेहरान की उस चेतावनी पर भी सवाल किया गया जिसमें कहा गया था कि हॉर्मुज़ स्ट्रेट से बिना अनुमति गुजरने वाले जहाज़ों को "निशाना बनाकर नष्ट कर दिया जाएगा", जबकि सीज़फ़ायर के दौरान इस अहम जलमार्ग से जहाज़ों को गुजरने की अनुमति होनी चाहिए, और क्या इसे युद्ध की कार्रवाई माना जा सकता है?

ख़ातिबज़ादेह ने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय क़ानून का पालन करेगा, साथ ही यह भी दलील दी कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग ओमान और ईरान के क्षेत्रीय जल सीमा का हिस्सा है और दोनों देशों ने पहले 'सद्भावना' के तहत सुरक्षित मार्ग की अनुमति दी थी.

उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपनी 'आक्रामकता' से पीछे हटता है, तो ईरान "सुरक्षित मार्ग के लिए सुरक्षा देगा."

जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब है कि ईरान जहाज़ों से गुजरने के लिए शुल्क नहीं लेगा या उन्हें धमकाएगा नहीं, तो मंत्री ने कहा कि ईरान चाहता है कि यह जलडमरूमध्य 'शांतिपूर्ण' रहे.

लेकिन उन्होंने जोड़ा कि सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए, ताकि 'युद्धपोतों के लिए इसका ग़लत इस्तेमाल' न हो, ईरान को ओमान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ एक प्रोटोकॉल पर काम करना होगा.

28 फ़रवरी को जंग शुरू होने के बाद से, तेहरान ने प्रभावी रूप से उस समुद्री मार्ग को रोक दिया है, जिससे आमतौर पर दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और लिक्विड नेचुरल गैस गुजरती है. इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है.

हालांकि दो हफ़्ते का सीज़फ़ायर इस शर्त पर तय हुआ था कि होर्मुज़ फिर से खुलेगा, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ जारी इसराइली हमलों के कारण यह अब भी बंद है.

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलाइन लेविट ने हालांकि बुधवार देर रात पत्रकारों से कहा कि जलडमरूमध्य के बंद होने की कोई भी रिपोर्ट ग़लत है और बताया कि वहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में 'बढ़ोतरी' हुई है.

इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने रात में चेतावनी दी कि जब तक ईरान के साथ 'वास्तविक समझौते' का पालन नहीं होता, तब तक अमेरिकी सेना क्षेत्र में बनी रहेगी और ट्रुथ सोशल पर जोर देकर कहा कि इस समझौते के तहत जलडमरूमध्य का 'खुला और सुरक्षित' रहना ज़रूरी है.

ख़ातिबज़ादेह ने कहा कि वह अमेरिका के साथ स्थायी समझ तक पहुंचने को लेकर 'काफ़ी संदेह' में हैं और वॉशिंगटन पर आरोप लगाया कि उसने बातचीत का इस्तेमाल, सैन्य कार्रवाई के लिए किया.

जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच तय वार्ता आगे बढ़ेगी, तो ख़ातिबज़ादेह ने कहा, "हम अब होने वाली घटनाओं पर नजदीकी से नज़र रखेंगे."

ख़ातिबज़ादेह ने आगे कहा, "लेकिन एक राजनयिक के रूप में मुझे पूरी उम्मीद है कि आख़िरकार हम एक समझदारी तक पहुंचेंगे और इसे अपने राष्ट्रीय हित में और क्षेत्रीय हित में सुलझाएंगे."

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