You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
तालिबान को लेकर भारत ने इस वजह से बदली अपनी रणनीति- द लेंस
1990 के दशक के अंत में अफ़ग़ानिस्तान के साथ भारत के रिश्ते काफ़ी खटास भरे थे.
भारत ने तालिबान प्रशासन के साथ रिश्ते नहीं रखे और जब अमेरिकी नेतृत्त्व वाली फ़ौजों ने तालिबान को काबुल से बाहर किया, तब भारत ने वहां दूतावास दोबारा खोला.
अगस्त 2021 में जब अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान प्रशासन वापस लौटा तो भारत ने फिर दूतावास बंद कर दिया.
मगर बीते चार साल ठीक वैसे नहीं थे, जैसे पहले तालिबान प्रशासन के समय थे.
भारत ने दरवाज़े खुले रखे और संपर्क बनाए रखा. इसी के तहत अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान प्रशासन के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी भारत आए और भारत ने उच्च स्तरीय बातचीत के बाद ये घोषणा की कि वो काबुल में दूतावास वापस खोलेगा.
मुत्तक़ी के भारत दौरे के बीच ही उधर पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर संघर्ष हुआ. बीते हफ़्ते की इन्हीं गतिविधियों से कई सवाल पैदा हुए. मुत्तक़ी की ये भारत यात्रा इतनी अहम क्यों है?
इसे पाकिस्तान में कैसे देखा जा रहा है? क्या ये भारत की नीतियों में किसी बदलाव का संकेत है?
ख़ुद तालिबान इस यात्रा से क्या हासिल करना चाह रहा है या भारत-अफ़ग़ानिस्तान के संबंधों की नज़दीक़ी का इस क्षेत्र की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
द लेंस के आज के एपिसोड में इन सभी मुद्दों पर चर्चा की गई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए भारत के पूर्व राजनयिक विवेक काटजू, वरिष्ठ पत्रकार निरुपमा सुब्रमण्यन और इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता फ़रहत जावेद.
प्रोड्यूसरः शिल्पा ठाकुर / सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः सुमित वैद
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां कर सकते हैं. आप हमें एक्स, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)