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भवानी देवी: तलवारबाज़ी में इतिहास बनाने वाली चैंपियन
- Author, पोथीराज
- पदनाम, बीबीसी तमिल के लिए
“कामयाबी हासिल करने तक कोशिशें करनी चाहिए. दृढ़ भाव से मेहनत करने से लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलती है.”
भारतीय तलवारबाज़ भवानी देवी ने एक अंग्रेज़ी अख़बार को दिए इंटरव्यू में कहा है कि जब भी उनका उत्साह कम होता है या नाकामी मिलती है, तो खुद को प्रोत्साहित करने के लिए वो इन शब्दों को दोहराती हैं.
भवानी देवी ने तलवारबाज़ी के खेल में भारत का नाम दुनिया भर में रोशन किया है. हांगज़ो एशियाई खेलों में भी उनसे मेडल की उम्मीद की जा रही है.
पिछले साल जून में भवानी देवी ने चीन के वूशी में आयोजित एशियाई चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतकर एक नया रिकॉर्ड बनाया था. तब भवानी देवी एशियाई चैंपियनशिप में तलवारबाज़ी में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं.
इसके अलावा, भवानी देवी ने एशियाई स्तर पर तलवारबाज़ी में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का रिकॉर्ड भी हासिल किया.
भवानी देवी ने न सिर्फ़ एशियाई चैंपियनशिप में अपनी पहचान बनाई है, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भी भवानी देवी ने अपनी प्रतिभा दिखाई है और भारत को गौरवान्वित किया है.
मां का योगदान
भवानी देवी की अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कामयाबी के पीछे उनकी मां रमानी का बड़ा योगदान रहा है. यह भवानी देवी की मां ही थीं जो हर बाधा का सामना करने पर उनके साथ खड़ी रहीं, उन्हें आवश्यक आत्मविश्वास और प्रोत्साहन दिया और उन्हें इस ऊंचाई तक पहुंचाया.
उनकी उपलब्धियों और पदकों की संख्या की सूची इतनी लंबी है कि भारतीय तलवारबाज़ी में भवानी देवी की हैसियत भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर होने जैसी ही है.
जब भवानी देवी चुनौतियों का सामना कर रही थीं तब उनकी उनकी मां रमानी देवी ने अपने आभूषण और संपत्ति बेचकर, बैंकों से ऋण लेकर, उन्हें विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया.
प्रधानमंत्री मोदी भी उनकी मां के योगदान की सराहना कर चुके हैं.
इस बारे में बीबीसी तमिल से बात करते हुए भवानी देवी ने कहा, "मुझे खुशी हुई जब प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार मन की बात में मेरी प्रशंसा की और मेरी मां के बारे में बताया. मैं बस इतना जानती हूं कि मैं पदक हासिल करती हूं और जीतती हूं. लेकिन मेरी उपलब्धि के पीछे मेरी मां की कड़ी मेहनत के बारे में लोग ज़्यादा नहीं जानते. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसे समझा और इसके बारे में बात की, इससे मुझे और अधिक उत्साह मिला."
भवानी देवी की मदद करने वाले लोगों में कई लोग शामिल हैं. इनमें तमिल फ़िल्मों के निर्देशक शशिकुमार भी शामिल हैं. भवानी देवी की मां रमानी देवी देवी के मुताबिक़, उन्होंने ट्रेनिंग दिलानें में मदद की है.
इसके अलावा राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत जे. जयललिता ने कई तरह के प्रोत्साहनों से भवानी देवी की मदद की, उनके विदेश में प्रशिक्षण की व्यवस्था की, जिससे उन्हें काफ़ी मदद मिली.
भवानी देवी की मां रमानी के मुताबिक़, आज तक तमिलनाडु सरकार भवानी देवी को विशिष्ट खिलाड़ियों की सूची में रखकर और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण और प्रशिक्षण खर्च देकर प्रोत्साहित कर रही है.
राष्ट्रीय तलवारबाज़ी चैंपियनशिप की नौ बार चैंपियन
भवानी देवी राष्ट्रीय तलवारबाज़ी चैंपियनशिप की नौ बार चैंपियन रही हैं. भवानी के कुछ और रिकॉर्ड्स इस तरह हैं-
- 2009: कॉमनवेल्थ तलवारबाज़ी में कांस्य पदक जीता
- 2010: एशियाई जूनियर एंड कैडेट चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता
- 2012: जर्सी कॉमनवेल्थ जूनियर चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल हासिल किया
- 2014: फिलीपींस में आयोजित एशियाई चैम्पियनशिप में सिल्वर
- 2015: मंगोलिया में आयोजित एशियाई चैम्पियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया
- 2020: टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया
- तलवारबाज़ी में ओलंपिक में भाग लेने वाली पहली भारतीय
- 2019: टूरनो सैटेलाइट फेंसिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता
- 2018: राष्ट्रमंडल खेलों में भवानी सबरे श्रेणी में गोल्ड मेडल पदक जीतकर, मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं
- 2022: लंदन राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता
भवानी देवी ने राष्ट्रीय स्तर पर तलवारबाज़ी में कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी शुरुआत अपमान का घूंट पीने से हुई थी. करियर के पहले ही टूर्नामेंट के दौरान तुर्की में महज तीन मिनट की देरी से पहुंचने के कारण भवानी देवी को 'ब्लैक कार्ड' दिया गया और बाहर भेज दिया गया.
तलवारबाज़ी के खेल में किसी महिला एथलीट को दी गई यह अधिकतम सजा है.
मैदान में अपने पांव जमाती गईं भवानी
भवानी देवी ने वह सजा स्वीकार कर ली और उसके बाद निश्चिन्त होकर खेल के मैदान में अपने पांव जमाती गईं और पीछे मुड़कर नहीं देखा.
केरल ने गढ़ा भवानी को अपनी सेकेंडरी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद भवानी देवी ने भारतीय खेल प्राधिकरण की थलासरे केंद्र को ज्वाइन किया और तलवारबाज़ी की क्षमताओं को बेहतर करने में जुट गईं. यह केंद्र भारत में तलवारबाज़ी में प्रशिक्षण देने के लिहाज से बेहतरीन केंद्र है. भवानी देवी कई टूर्नामेंटों में केरल का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.
भवानी देवी का पूरा नाम सातलवाड़ा आनंद सुंदररमन भवानी देवी है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि वह आंध्र राज्य से हैं क्योंकि उनका नाम सातलवाड़ा है. लेकिन असल में भवानी देवी तमिलनाडु की मूल निवासी हैं.
यह जानकारी भवानी देवी की मां रमानी ने बीबीसी से बात करते हुए दी.
उन्होंने कहा, “ख़बरों में कहा जाता है कि भवानी देवी आंध्र प्रदेश से हैं क्योंकि उनका नाम सातलावाड़ा है. लेकिन यह सच नहीं है. हमारा मूल स्थान तमिलनाडु है. हम तमिल भूमि से हैं. भवानी देवी के पिता का जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था. लेकिन हमारा परिवार मूल रुप से चेन्नई के वन्नारपेट से है. भवानी देवी का जन्म और उनके सभी भाई-बहनों का जन्म तमिलनाडु में हुआ था. मुझे गर्व है कि भवानी देवी एक तलवार चलाने वाली तमिल लड़की हैं.”
उनकी मां रमानी बताती हैं कि भवानी देवी एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार की समस्याओं का सामना करते हुए बड़ी हुई थीं. 23 अगस्त, 1993 को परिवार के पांचवीं संतान के तौर पर भवानी देवी का जन्म हुआ था.
हालाँकि, उन्हें 11 साल की उम्र से ही तलवार चलाने का प्रशिक्षण दिया गया था.
तलवारबाज़ी कितना महंगा खेल है?
भवानी की मां बताती हैं, “आम परिवार के लिए तलवारबाज़ी का खेल थोड़ा महंगा है. इस खेल में इस्तेमाल होने वाले उपकरण महंगे हैं. इसलिए शुरुआत में भवानी ने बांस की पट्टी का इस्तेमाल तलवार की तरह करते हुए प्रशिक्षण लिया.”
उनकी मां कहती हैं, “इसके बाद मैंने भवानी की दिलचस्पी के बारे में तमिलनाडु के खेल विकास प्राधिकरण को दी और वहां से भवानी को प्रशिक्षण मिलने लगा. फिर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का सिलसिला शुरू हुआ. हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि वह प्रत्येक टूर्नामेंट में हिस्सा ले सके, तब मैंने अपने आभूषण बेच दिए. बैंक के अलावा जान पहचान के लोगों से भी कर्ज लिया. इसके बाद भवानी के जीते हुए मेडलों की सूची अन्नाद्रमुक सांसद वेंकटेश को दी और उन्होंने कहा कि वे तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता से बात करेंगे.”
रमानी देवी के मुताबिक़, उनकी बेटी की प्रतिभा के बारे में जानने के अगले ही दिन उन्होंने भवानी के अमेरिका में प्रशिक्षण लेने के लिए वित्तीय सहायता दी.
इसके बाद भवानी देवी ने दुनिया के कई दूसरे देशों में प्रशिक्षण लिया.
इन प्रशिक्षणों के लिए आर्थिक मदद मिलने के बाद भी दूसरे खर्चे जुटाना आसान नहीं होता था.
उनकी मां रमानी देवी कहती हैं, “कई बार आर्थिक संकट होता था. मैं परेशान हो जाती थी और बेटी को तलवारबाज़ी छोड़ने के लिए कहती थी. लेकिन भवानी ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी और आत्मविश्वास के साथ लगी रही. उसे हमेशा विश्वास था कि वह कामयाबी हासिल कर सकती है. इसी भरोसे ने उसे यहां तक पहुंचाया है.”
केरल में ज़्यादा बेहतर सुविधाएं?
इसके बाद भवानी देवी ने दुनिया के कई दूसरे देशों में प्रशिक्षण लिया. इन प्रशिक्षणों के लिए आर्थिक मदद मिलने के बाद भी दूसरे खर्चे जुटाना आसान नहीं होता था.
उनकी मां रमानी देवी कहती हैं, “कई बार आर्थिक संकट होता था. मैं परेशान हो जाती थी और बेटी को तलवारबाज़ी छोड़ने के लिए कहती थी. लेकिन भवानी ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी और आत्मविश्वास के साथ लगी रही. उसे हमेशा विश्वास था कि वह कामयाबी हासिल कर सकती है. इसी भरोसे ने उसे यहां तक पहुंचाया है.”
पड़ोसी राज्य केरल अपने यहां खिलाड़ियों को कहीं ज़्यादा बेहतर सुविधाएं और मदद उपलब्ध कराता है, इसे देखते हुए रमानी देवी ने अपनी बेटी को उच्च शिक्षा के लिए केरल भेजा और उम्मीद के मुताबिक भवानी को वित्तीय मदद मिलने लगी. भवानी ने कई प्रतियोगिताओं में केरल राज्य का प्रतिनिधित्व भी किया है.
भारत के पूर्व क्रिकेटर और मौजूदा कोच राहुल द्रविड़ की गो स्पोर्ट्स फाउंडेशन ने भी विदेशों में स्पेशलिटी वाली ट्रेनिंग के लिए भवानी की मदद की है. तमिलनाडु सरकार ने भी भवानी देवी को लगातार वित्तीय मदद मुहैया कराया है. लेकिन इन सबके बीच सबसे ख़ास बात भवानी देवी का खेल के प्रति अनुशासन ही रहा है.
उनकी मां कहती हैं कि अब तक के सफ़र में भवानी ने सामाजिक बाध्यताओं को भी झेला है, आस पड़ोस के लोग उनकी लगातार विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाते थे लेकिन भवानी ने इन सब पर कभी ध्यान नहीं दिया.
ओलंपिक पदक की उम्मीद
भवानी देवी टोक्यो ओलंपिक 2020 में पदक से भले चूक गई हों लेकिन उन्हें पेरिस ओलंपिक में पदक का दावेदार माना जा रहा है.
भवानी की मां रमानी देवी ने बताया, “टोक्यो ओलंपिक में तैयारी के लिए बहुत वक्त नहीं मिला था, जब उसने क्वालिफ़ाई किया, इसके बाद महज तीन महीने का समय था. इसके बाद भी उसके प्रदर्शन अच्छा रहा. ओलंपिक में भाग लेना हर एथलीट का सपना होता है. हालांकि पदक नहीं मिला. लेकिन वह बीते दो साल से लगातार ट्रेनिंग ले रही है, खूब मेहनत कर रही है और मुझे पूरा भरोसा है कि पेरिस ओलंपिक में पदक जीतेगी.”
2023 की एशियाई तलवारबाज़ी चैंपियनशिप में भवानी ने कांस्य पदक जीता है, लेकिन सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में उन्होंने विश्व की नंबर एक खिलाड़ी मिसाकी इमुरा को हराया. अपने करियर में उन्होंने पहली बार मिसाकी को हराया था.
इस जीत से ओलंपिक मेडल की उम्मीद तो बंधती है, लेकिन उससे पहले भवानी अपनी कामयाबी को हांगज़ो एशियन गेम्स में भी दोहराना चाहेंगी. हांगज़ो एशियन गेम्स में भवानी देवी पर सबकी नज़रें 26 और 27 सितंबर को टिकी होंगी, जब उनके मुक़ाबले खेले जाएंगे.
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