सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर क्या अब कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा, जानिए हर सवाल का जवाब

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इतवार, 1 फ़रवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण सुनने के बाद आपको लग सकता है कि इसमें आम लोगों के लिए ख़ास कुछ नहीं था.

पर कुछ ऐसी घोषणाएं हैं जिन्हें ज़्यादा तवज्जो तो नहीं मिली, लेकिन उनका असर बड़ा हो सकता है.

हालांकि वित्त मंत्री ने बजट में टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया.

लेकिन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स यानी एसजीबी से जुड़ी घोषणा के बाद लोग कई सवाल पूछ रहे हैं. क्या वित्त मंत्री ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स को टैक्स के दायरे में ला दिया है? क्या ये टैक्स सभी सिरीज़ पर लागू होगा? क्या किसी तरह की कुछ भी मिली है? किस तरह का कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा और कितना.

जानिए, इन सभी सवालों के जवाब-

1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स पर टैक्स नियम बदले

अभी तक क्या था?- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स पर मिलने वाला मुनाफ़ा (कैपिटल गेन्स) टैक्स फ्री था बशर्ते आप इन्हें मैच्योरिटी तक अपने पास रखें. इससे फर्क नहीं पड़ता था कि आपने इन्हें बॉन्ड्स सिरीज़ जारी होते समय ख़रीदा था या फिर बीएसई या एनएसई पर सेकेंडरी मार्केट्स से.

क्या बदला- सरकार ने सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए एसजीबी पर मिलने वाली कैपिटल गेन टैक्स छूट ख़त्म करने का एलान किया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी.

टैक्स छूट तभी मिलेगी- अगर आपने एसजीबी रिज़र्व बैंक के प्राइमरी इश्यू के समय ख़रीदा हो और आपने इन्हें मैच्योरिटी तक अपने पास रखा हो.

अगर एसजीबी एक्सचेंज से ख़रीदा गया है और उसे 1 अप्रैल 2026 के बाद मैच्योरिटी तक रखने की योजना है, तो अब आपको क़ीमत में हुए अंतर पर कैपिटल गेन टैक्स देना होगा.

अब कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट केवल तभी मिलेगी जब ये दो शर्तें पूरी होंगी-

पहली, निवेशक ने बॉन्ड को तब खरीदा हो जब रिज़र्व बैंक ने इसे पहली बार जारी किया था.

और दूसरी, निवेशक ने उस बॉन्ड को जारी होने की तारीख़ से मैच्योरिटी तक लगातार अपने पास रखा हो.

अगर आपने स्टॉक एक्सचेंज (मसलन एनएसई या बीएसई) से किसी दूसरे निवेशक से पुराना गोल्ड बॉन्ड खरीदा है, तो अब मैच्योरिटी पर होने वाले मुनाफ़े पर आपको टैक्स देना होगा. अब सिर्फ़ मैच्योरिटी तक बॉन्ड को होल्ड करना काफी नहीं है, यह भी मायने रखेगा कि आपने उसे कब और कहां से खरीदा था.

2. डेरिवेटिव्स सौदों पर ज़्यादा टैक्स

यही वो एलान है जिसे बजट 2026 की सबसे अहम घोषणा माना जा रहा है. सरकार ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग पर सख़्ती का इरादा दिखाया है.

अभी तक क्या- इक्विटी डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी अब भी लगता था, लेकिन फ्यूचर्स में इसकी दर 0.02 फ़ीसदी थी और ऑप्शंस में ये दर 0.10 फ़ीसदी थी. इसे बढ़ाने का एलान किया गया है. ज़ाहिर है अब हर एफ़एंडओ सौदे की लागत अब पहले से अधिक होगी.

क्या बदला- फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 फ़ीसदी बढ़ाकर 0.05 फ़ीसदी करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा ऑप्शंस पर एसटीटी 0.10 फ़ीसदी से बढ़ाकर 0.15 फ़ीसदी कर दिया गया है.

इसका मतलब ये हुआ कि एक लाख रुपये के फ्यूचर्स सौदे की बिक्री पर जहाँ अभी 20 रुपये एसटीटी के रूप में देने पड़ते हैं, वहीं वित्त मंत्री के एलान के बाद अब एसटीटी 50 रुपये लगेगा.

ये बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि हर सौदे में टैक्स देनदारी में इस बढ़ोतरी का कुल मिलाकर मुनाफ़े पर ही असर पड़ेगा.

3. एनआरआई से प्रॉपर्टी ख़रीदना हुआ आसान

अभी तक क्या- अनिवासी भारतीयों यानी एनआरआई से संपत्ति ख़रीदने की प्रक्रिया कुछ जटिल है, जिसे आसान बनाने का दावा किया गया है.

अभी तक संपत्ति ख़रीदने वाले को टैक्स डिडक्शन एंड कलेक्शन अकाउंट नंबर (टीएएन) के लिए अलग से अप्लाई करना पड़ता था ताकि वह टीडीएस का पेमेंट कर सके.

क्या बदला- वित्त मंत्री के नए प्रस्ताव के अनुसार एनआरआई की प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए अब भारतीय ख़रीदारों को टीएएन की ज़रूरत नहीं होगी.

भारतीय ख़रीदार अपने पैन नंबर का इस्तेमाल करके टीडीएस काट कर भुगतान कर सकेंगे, ठीक वैसे ही जैसे वे किसी भारतीय निवासी से संपत्ति ख़रीदते समय करते हैं. कहा जा रहा है कि इससे लोगों को जटिल कागजी कार्रवाई से कुछ निजात मिल सकेगी.

4. क्रिप्टो को लेकर बजट में क्या बदला

अभी तक क्या- क्रिप्टो लेन-देन की जानकारी टैक्स अधिकारियों को देना ज़रूरी है, लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि जानकारी नहीं देना या ग़लत जानकारी देना अभी सामान्य बात है.

क्या बदला- क्रिप्टो निवेशकों और प्लेटफॉर्म्स के लिए बड़ा बदलाव तय हो गया है. सरकार अब क्रिप्टो एसेट्स की जानकारी नहीं देने या ग़लत जानकारी देने पर जुर्माना लगाने जा रही है.

1 अप्रैल 2026 से क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की जानकारी नहीं देने पर 200 रुपये रोज़ाना की पेनल्टी लगेगी, जबकि ग़लत जानकारी देने और इन्हें ठीक नहीं करने पर 50 हज़ार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है.

5. विदेश में पढ़ाई करने, इलाज कराने वालों को राहत

अभी तक क्या- लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम यानी एलआरएस के तहत विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर टीसीएस लगता है.

शिक्षा और मेडिकल के मामले में 10 लाख रुपये से अधिक की रकम भेजने पर 5 फ़ीसदी का टैक्स (टीसीएस) लगता है.

क्या बदला- बजट में सरकार ने इस नियम में कुछ ढील दी है. सरकार ने एलआरएस के तहत शिक्षा और मेडिकल ज़रूरतों के लिए भेजे जाने वाले पैसों पर टीसीएस की दर 5 फ़ीसदी से घटाकर 2 फ़ीसदी कर दी है.

यह कटौती 10 लाख रुपये से ज्यादा की रेमिटेंस पर लागू होगी. इससे विदेश में पढ़ने वाले छात्रों के लिए फंड भेजना अब पहले के मुकाबले सस्ता हो जाएगा.

टीसीएस और एलआरएस क्या है?

टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स यानी टीसीएस वह टैक्स है, जो बैंक या अधिकृत डीलर विदेश पैसे भेजते समय वसूलते हैं.

हालांकि यह कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं है. इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करते समय यह रक़म आपकी कुल टैक्स देनदारी में एडजस्ट हो जाती है और अगर आपने अधिक टैक्स चुका दिया है तो बाकी की रक़म रिफ़ंड हो जाती है.

एलआरएस यानी लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम, भारतीय रिज़र्व बैंक की एक सुविधा है, जिसके तहत भारत के निवासी हर वित्त वर्ष में एक निश्चित रक़म विदेश भेज सकते हैं.

भारतीय रिज़र्व बैंक ने अभी यह रकम हर वित्त वर्ष में ढाई लाख डॉलर तय कर रखी है. यह रक़म शिक्षा, इलाज, यात्रा, गिफ्ट या विदेशी निवेश जैसे कामों के लिए भेजी जा सकती है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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