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अविश्वास प्रस्ताव पर बहस: बीजेपी के किरेन रिजिजू ने कैसे किया अपनी सरकार का बचाव
नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ संसद में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार से चर्चा शुरू हो चुकी है.
लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कराने की अनुमति दी है.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कहा कि 2014 से पहले पूर्वोत्तर के लोगों के साथ दिल्ली और बड़े शहरों में उत्पीड़न होता था लेकिन इसके बाद स्थिति बदली है.
रिजिजू ने कहा, "कोविड के समय जब लगभग पूरी दुनिया फेल हो चुकी थी. भारत ने दिखा दिया कि महामारी कोविड से भी हम निपट सकते हैं. पूरे देश में मुफ़्त में टीका लगा."
उन्होंने कहा, "2014 से पहले पूर्वोत्तर के कई लोगों को दिल्ली और देश के अन्य बड़े शहरों में नस्लीय उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था. 2014 के बाद स्थिति बदली और आज़ादी के बाद पहली बार गुवाहाटी में डीजीपी कॉन्फ्रेंस हुआ. इस बैठक के दौरान पीएम ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें."
अविश्वास प्रस्ताव पर रिजिजू ने कहा, "वो समय चला गया जब विदेशी ताकतें भारत को बताती थीं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं...आज कोई भी विदेश ताकत हमारे आंतरिक मामलों में दखल नहीं दे सकती."
उन्होंने विपक्ष से कहा, "आज जब आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं तो उसमें भी आप साथ आइए. इसको मिलकर सेलीब्रेट करते हैं. ये कोई बीजेपी का कार्यक्रम नहीं है देश का कार्यक्रम है. मैं इस सदन में अपनी पार्टी और सरकार की तरफ से आपसे अपील करना चाहता हूं कि आप भी इसमें आइए. 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित बनाने के लिए हमें साथ काम करना चाहिए. मोदी जी के नेतृत्व का भी आप समर्थन करें तभी हम मानेंगे कि आप देश के लिए सोचते हैं."
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता किरण रिजिजू ने कहा, "गठबंधन को 'इंडिया' नाम देने से कुछ नहीं होगा जबकि आप वास्तव में भारत के खिलाफ काम कर रहे हैं."
डिंपल यादव ने कहा, 'मणिपुर पर सरकार का रवैया संवेदनहीन'
उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट से सांसद डिंपल यादव ने मंगलवार को सरकार के ख़िलाफ़ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी बात रखी.
डिंपल यादव ने कहा, “सत्ता पक्ष के मंत्री कह रहे थे कि राजस्थान, गुजरात, और छत्तीसगढ़ की चर्चा होनी चाहिए जहां महिलाओं के ख़िलाफ़ जघन्य अपराध हो रहे हैं.
ऐसे में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की भी चर्चा ज़रूर होनी चाहिए क्योंकि एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि यूपी में हर तीन घंटे में एक महिला शारीरिक उत्पीड़न का शिकार होती है. और यूपी और केंद्र की डबल इंजन की सरकार इसका संज्ञान नहीं ले रही है.
मणिपुर में जो हुआ है, वो वह बेहद संवेदनशील घटना है. लेकिन सरकार का रवैया इस मामले में बेहद संवेदनहीन रहा है. ये अंहकार में डूबी हुई सरकार है.”
एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने बताई, अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने की वजह
महाराष्ट्र की बारामती लोकसभा सीट से एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले ने अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि वे इस प्रस्ताव का समर्थन कर रही हैं क्योंकि "यही देश की भावना और आवाज़ है."
सुप्रिया सुले ने कहा कि सरकार 'नौ साल, नौ रत्न' का प्रचार अभियान चला रही है लेकिन इस सरकार का संघीय ढाँचे में कोई विश्वास नहीं है, नौ राज्यों का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, "केंद्र की सरकार ने नौ साल में नौ बार चुनी हुई राज्य सरकारों को गिराया है."
उन्होंने कहा, 'बहुत हो गई महंगाई की मार' का नारा लगाने वालों को महंगाई की बिल्कुल परवाह नहीं है, "केवल टमाटर नहीं, केवल गैस नहीं, दूध, आलू, प्याज़, चाय, दाल, तेल...कौन सी चीज़ है जिसकी क़ीमत नहीं बढ़ी है."
उन्होंने कहा, "यही वजह है कि मेरा विश्वास इस सरकार पर नहीं है."
सुप्रिया सुले ने कहा, "हर स्तर पर भारत का प्रदर्शन गिर रहा है और सरकार इसे अच्छे दिन बता रही है, हंगर इंडेक्स, हेल्थ इंडेक्स, ह्यूमन फ्रीडम इंडेक्स, डेमोक्रेसी इंडेक्स, जेंडर इंडेक्स, हर मामले में हम नीचे गए हैं."
उन्होंने पूछा, "सरकार ने नोटबंदी जैसा फ़ैसला किया, कहा गया कि डिजिटल इकोनॉमी होगी, कैश पर निर्भरता कम होगी, लेकिन सच ये है कि अर्थव्यवस्था में कैश का सर्कुलेशन बढ़ गया है, क्यों की गई नोटबंदी?"
उन्होंने मणिपुर के मामले में सरकार के रवैए को 'महिलाओं के प्रति असंवेदनशील' बताया.
राहुल गांधी की जगह गौरव गोगोई ने शुरू की चर्चा
नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ संसद में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार से चर्चा शुरू हो चुकी है.
लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कराने की अनुमति दी है.
आज लोकसभा में असम से कांग्रेस के लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने प्रस्ताव पेश कर इस पर पहला भाषण दिया.
माना जा रहा था कि मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सबसे पहला भाषण राहुल गांधी देंगे.
लेकिन जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो पता चला कि भाषण की शुरुआत गौरव गोगोई करेंगे.
गौरव गोगोई पूर्वोत्तर राज्य असम के हैं और मणिपुर भी पूर्वोत्तर में ही है. शायद कांग्रेस ने इसीलिए राहुल के बदले गौरव गोगोई को आगे किया.
गौरव गोगोई बहस की शुरुआत के लिए खड़े हुए तो संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पूछा कि राहुल गांधी का क्या हुआ, हम तो इंतज़ार कर रहे थे.
राहुल गांधी की सांसदी आपराधिक मानहानि के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद इसी साल 24 मार्च को चली गई थी.
लेकिन पिछले हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को राहत मिली थी और सांसदी बहाल हो गई थी.
गौरव गोगोई ने पूछे तीन सवाल
गौरव गोगोई ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए तीन सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा-
- आज तक पीएम नरेंद्र मोदी मणिपुर क्यों नहीं गए?
- हिंसा पर पीएम मोदी ने अब तक बयान क्यों नहीं दिया?
- प्रधानमंत्री ने मणिपुर के मुख्यमंत्री को बर्खास्त क्यों नहीं किया?
गौरव गोगोई ने मोदी सरकार को कई मोर्चों पर घेरा. गोगोई ने कहा कि पीएम मोदी हर अहम मुद्दे मौन व्रत धारण कर लेते हैं. कांग्रेस सांसद ने कहा कि चाहे वह राष्ट्रीय मामला हो या अंतरराष्ट्रीय मामला हो हर मौक़े पर पीएम मोदी चुप्पी धारण कर लेते हैं.
गोगोई ने कहा, ''बीजेपी एक भारत की बात करती है लेकिन उसने दो मणिपुर बना दिया है. बीजेपी सत्ता के लिए देश की अखंडता को ख़तरे में डाल रही है.''
गौरव गोगोई को जवाब देने के लिए बीजेपी ने निशिकांत दुबे आगे किया. निशिकांत दुबे ने इंडिया गठबंधन को टारगेट करते हुए कहा कि इस गठबंधन में लोगों आपस में ही तमाम लड़ाइयां हैं. दुबे ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी निशाने पर लिया
ये पहली बार नहीं है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया हो. इससे पहले साल 2018 में तेलगू देशम पार्टी मोदी सरकार के ख़िलाफ़ ये प्रस्ताव लेकर आई थी, कहा गया था कि मोदी सरकार आंध्र प्रदेश को फंड आवंटित नहीं कर रही है.
जब चारों तरफ़ इस अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा हो रही है तो ऐसे मे हम आपको बता रहे हैं कि आख़िर ये प्रस्ताव होता क्या है और कितना महत्वपूर्ण है.
बीजेपी ने कैसे दिया जवाब?
सत्ताधारी पक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करते हुए झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपने पूरे भाषण में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के विरोधाभासों पर ज़ोर दिया.
उन्होंने टीएमसी, डीएमके, जेडीयू और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे दलों के कांग्रेस के साथ अतीत के टकराव का विस्तार से ज़िक्र किया, उन्होंने तंज़ करते हुए कहा कि इस गठबंधन के ज़्यादातर लोग गठबंधन 'इंडिया' का "फुल फॉर्म नहीं बता पाएँगे".
निशिकांत दुबे ने अविश्वास प्रस्ताव को 'ग़रीब के बेटे' और 'लोगों के लिए घर बनाने वाले' व्यक्ति पर हमला बताया.
दुबे ने सोनिया गांधी का नाम लेकर उनके बेटे और दामाद का ज़िक्र किया, उन्होंने अपने भाषण में कई बार 'दामाद' शब्द का प्रयोग किया जिस पर विपक्ष ने कई बार विरोध किया, उन्होंने कहा कि किसी का भी दामाद हो सकता है, मैं किसी का नाम नहीं ले रहा हूँ.
क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव?
संसदीय लोकतंत्र में कोई सरकार तभी सत्ता में रह सकती है, जब उसके पास सीधे निर्वाचित सदन यानी लोकसभा में बहुमत हो.
संविधान के अनुच्छेद 75(3) के मुताबिक़ मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति ज़िम्मेदार होता है. इस सामूहिक ज़िम्मेदारी को परखने के लिए लोकसभा में एक अलग नियम है, जिसे अविश्वास प्रस्ताव कहा जाता है. अविश्वास प्रस्ताव ये परखता है कि क्या सरकार के पास समर्थन है.
कोई भी लोकसभा सांसद जो 50 सांसदों का समर्थन हासिल कर सकता है, किसी भी समय सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर सकता है.
इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होती है. जो सांसद इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं वो सरकार की कमियों को उजागर करते हैं.
सरकार भी इन आरोपों पर अपना पक्ष सामने रखती है. इसके बाद प्रस्ताव पर वोटिंग की जाती है. अगर सरकार के खिलाफ़ बहुमत में वोट पड़ते हैं तो सरकार गिर जाती है.
क्या मोदी सरकार को परेशान होने की ज़रूरत है?
इसका सीधा सा जवाब है- नहीं.
लोकसभा में बहुमत के लिए 272 सांसदों की ज़रूरत है. एनडीए के पास 331 सांसद हैं. अकेले बीजेपी के पास 303 सांसद हैं. इसका मतलब यह है कि भले ही सभी ग़ैर-एनडीए दल एक साथ आ जाएं फिर भी बीजेपी के पास अविश्वास प्रस्ताव से बचने के लिए पर्याप्त संख्या है.
26 पार्टियों के गठबंधन इंडिया के पास लोकसभा में 144 सांसद हैं, वहीं वो पार्टियां जो इंडिया या एनडीए दोनों का हिस्सा नहीं हैं जैसे बीजेडी, बीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस उनके पास 70 सासंद हैं.
अविश्वास प्रस्ताव का इस्तेमाल तब भी किया जाता है, जब विपक्ष सरकार से किसी ऐसे मुद्दे पर चर्चा चाहता है जिस पर बात करने से सरकार बचती है.
इस बार कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियों को ये पता है कि वो संख्या के आधार पर इस प्रस्ताव को कभी पास नहीं करा पाएंगी लेकिन फिर भी ये प्रस्ताव इसलिए लाया गया है ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर के हालात पर सदन में विस्तृत बयान दें.
जब नेहरू के ख़िलाफ़ पहला अविश्वास प्रस्ताव लाया गया
1963 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार के ख़िलाफ़ आचार्य जेबी कृपलानी ने पहला अविश्वास प्रस्ताव लाया था. प्रस्ताव पर चार दिनों तक 21 घंटे तक बहस चली, जिसमें 40 सांसदों ने भाग लिया.
अपने बयान में लोकसभा में नेहरू ने कहा था, “अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य सरकार में बैठी पार्टी को हटाकर उसकी जगह लेना होता है और ये होना भी चाहिए. वर्तमान उदाहरण से यह स्पष्ट है कि ऐसी कोई अपेक्षा या आशा अविश्वास प्रस्ताव से नहीं थी. हालांकि बहस कई मायनों में दिलचस्प थी और मुझे लगता है कि चर्चा लाभदायक भी थी. मैं इस प्रस्ताव और इस बहस का स्वागत करता हूं. मैंने महसूस किया है कि यदि हम समय-समय पर इस प्रकार के प्रीऑडिकल टेस्ट करते रहें तो यह अच्छी बात होगी. ”
तब से संसद में 27 अविश्वास प्रस्ताव लाए गए हैं.
साल 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, जिसके चलते उनकी सरकार गिर गई थी. एआईएडीएमके से एनडीए गठबंधन छोड़ दिया था, जिसके बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया गया.
इस प्रस्ताव की वोटिंग में सत्तारूढ़ एनडीए को 269 वोट मिले, जबकि विपक्ष को 270 वोट मिले थे.
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